Law4u - Made in India

क्या कोई कपल एक साल तक अलग-अलग रहे बिना तलाक ले सकता है?

18-Oct-2026
तलाक

Answer By law4u team

भारतीय कानून के तहत सामान्य नियम यह है कि आपसी सहमति से तलाक यानी म्युचुअल कंसेंट डिवोर्स लेने के लिए पति-पत्नी को कम से कम एक साल या उससे अधिक समय तक अलग-अलग रहना अनिवार्य होता है। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (HMA) की धारा 13बी के अनुसार, आपसी सहमति से तलाक की याचिका दाखिल करने से पहले यह साबित करना होता है कि दोनों पक्ष पिछले एक साल या उससे अधिक समय से एक-दूसरे के साथ नहीं रह रहे हैं और वे अपनी मर्जी से अलग हो रहे हैं तथा उनका साथ रहना संभव नहीं है। लेकिन क्या इस एक साल की अवधि को कम किया जा सकता है या इसे पूरी तरह से माफ किया जा सकता है, इस पर माननीय उच्चतम न्यायालय ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिए हैं। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक फैसलों में यह तय किया है कि कुछ असाधारण परिस्थितियों में इस एक साल की अनिवार्य अवधि को माफ किया जा सकता है। यदि पति-पत्नी के बीच सुलह की कोई भी उम्मीद नहीं बची है और वे लंबे समय से मानसिक प्रताड़ना या गंभीर वैवाहिक कलह का सामना कर रहे हैं, तो वे इस एक साल की शर्त से छूट के लिए अदालत में आवेदन कर सकते हैं। इस कानूनी प्रक्रिया को समझने के लिए आपको पारिवारिक अदालत या फैमिली कोर्ट में जाना होगा और इसके लिए आपको निम्नलिखित महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं और प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। 1. सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (HMA) की धारा 13बी की उपधारा (1) के तहत सामान्य प्रावधान यह है कि तलाक की पहली गति यानी फर्स्ट मोशन की अर्जी तभी दी जा सकती है जब दोनों पक्षों ने कम से कम एक वर्ष या उससे अधिक समय तक अलग निवास किया हो। 2. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया था कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सर्वोच्च न्यायालय के पास यह पूर्ण अधिकार है कि वह बिना एक साल का इंतजार किए सीधे विवाह को विघटित यानी समाप्त कर सकता है यदि विवाह पूरी तरह से मृत हो चुका है और सुलह की कोई गुंजाइश नहीं है। हालांकि यह शक्ति केवल उच्चतम न्यायालय के पास है, स्थानीय पारिवारिक न्यायालयों के पास धारा 13बी की एक साल की अवधि को सीधे तौर पर पूरी तरह समाप्त करने का क्षेत्राधिकार सामान्यतः नहीं होता है, लेकिन वे अन्य कानूनी रास्तों पर विचार कर सकते हैं। 3. यदि आप एक साल पूरा होने से पहले ही तलाक चाहते हैं, तो आप धारा 13बी के तहत अपनी याचिका के साथ-साथ एक विशेष माफी आवेदन यानी वेवर एप्लीकेशन भी दाखिल कर सकते हैं, जिसमें उन असाधारण कारणों का उल्लेख होना चाहिए जिनके कारण एक साल इंतजार करना संभव या उचित नहीं है। 4. असाधारण परिस्थितियों के अंतर्गत वे मामले आते हैं जहां दोनों पक्ष आपसी सहमति से यह स्वीकार करते हैं कि उनके बीच के मतभेद इतने गहरे हैं कि उनका साथ रहना किसी एक या दोनों पक्षों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। 5. इसके अलावा यदि दोनों पक्षों ने पहले से ही घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 (DV Act) या भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत एक-दूसरे के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करा रखे हैं, और अब वे सभी मामलों को आपसी समझौते के तहत हमेशा के लिए समाप्त करना चाहते हैं, तो अदालत इस स्थिति को भी एक मजबूत आधार मान सकती है। 6. आपराधिक मुकदमों और दीवानी मामलों के निपटारे के साथ जब आप आपसी समझौते का हलफनामा अदालत में पेश करते हैं, तो अदालत इस बात पर विचार करती है कि यदि विवाह को कानूनी रूप से जारी रखा गया तो केवल मुकदमेबाजी बढ़ेगी जिसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकलेगा। 7. पारिवारिक अदालत में जब आप फर्स्ट मोशन की अर्जी दाखिल करते हैं, तो दोनों पक्षों को अदालत के समक्ष उपस्थित होना पड़ता है और अपने बयान दर्ज कराने होते हैं कि वे बिना किसी दबाव, जोर-जबरदस्ती या धोखे के अपनी मर्जी से अलग हो रहे हैं। 8. फर्स्ट मोशन के बाद कानून के अनुसार छह महीने की कूलिंग-ऑफ पीरियड या प्रतीक्षा अवधि तय की गई है ताकि दोनों पक्षों को अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का मौका मिल सके। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी फैसला दिया है कि यदि सुलह की कोई संभावना ही नहीं है और पक्षकार पिछले कई महीनों से मानसिक पीड़ा झेल रहे हैं, तो इस छह महीने की अवधि को भी माफ किया जा सकता है। 9. यदि आप एक साल पूरे होने से पहले ही पारिवारिक अदालत में अर्जी देते हैं और अदालत आपकी माफी की अर्जी को खारिज कर देती है, तो आपको उच्च न्यायालय यानी हाई कोर्ट में नागरिक रिट याचिका या आपराधिक विविध याचिका के माध्यम से चुनौती देनी पड़ सकती है, जहां संविधान के अनुच्छेद 226 या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के प्रावधानों के तहत राहत की मांग की जा सकती है। 10. इसलिए व्यावहारिक रूप से यह सलाह दी जाती है कि यदि आप वास्तव में एक साल पूरे होने से पहले तलाक चाहते हैं, तो किसी अनुभवी पारिवारिक मामलों के वकील से संपर्क करें जो आपके मामले के तथ्यों का अध्ययन करके फैमिली कोर्ट में एक मजबूत आवेदन तैयार कर सके जिसमें यह साबित किया जा सके कि प्रतीक्षा करने से केवल अनावश्यक उत्पीड़न और समय की बर्बादी होगी।

तलाक Verified Advocates

Get expert legal advice instantly.

Advocate Piyush Mishra

Advocate Piyush Mishra

Anticipatory Bail,Family,Motor Accident,R.T.I,Criminal,

Get Advice
Advocate Arshad Khan

Advocate Arshad Khan

Banking & Finance, Consumer Court, Corporate, Medical Negligence, Property

Get Advice
Advocate Nitin Kumar Jain

Advocate Nitin Kumar Jain

Cheque Bounce, Consumer Court, Court Marriage, Divorce, GST, Domestic Violence, Family, Startup, Tax, Trademark & Copyright

Get Advice
Advocate Kajol Soni

Advocate Kajol Soni

Anticipatory Bail, Arbitration, Cheque Bounce, Civil, Corporate, Documentation, GST, Tax

Get Advice
Advocate Sandip Eknath Virle

Advocate Sandip Eknath Virle

Anticipatory Bail, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Consumer Court, Court Marriage, Criminal, Divorce, Documentation, Domestic Violence, Family, High Court, Muslim Law, RERA, Succession Certificate, Wills Trusts, Revenue

Get Advice
Advocate Puran Maurya

Advocate Puran Maurya

Anticipatory Bail, Arbitration, Banking & Finance, Cheque Bounce, Civil, Consumer Court, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Domestic Violence, Family, High Court, Insurance, Landlord & Tenant, Medical Negligence, Motor Accident, Property, R.T.I, Succession Certificate, Wills Trusts

Get Advice
Advocate Yash Sharma

Advocate Yash Sharma

Anticipatory Bail, Arbitration, Civil, Consumer Court, Corporate, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Domestic Violence, Family, Insurance, Labour & Service, Motor Accident, Startup, Tax, Trademark & Copyright, Documentation, GST

Get Advice
Advocate Mayank Sharma

Advocate Mayank Sharma

Anticipatory Bail, Banking & Finance, Cheque Bounce, Consumer Court, Criminal, Cyber Crime, Breach of Contract, Civil, Domestic Violence, Corporate, RERA, R.T.I, Recovery, Divorce

Get Advice
Advocate Lingam V

Advocate Lingam V

Anticipatory Bail, Cheque Bounce, Criminal, Divorce, Documentation

Get Advice
Advocate Bhoopathi Shankar

Advocate Bhoopathi Shankar

Property, Anticipatory Bail, Bankruptcy & Insolvency, Breach of Contract, Banking & Finance, Cheque Bounce, Civil, Child Custody, Consumer Court, Criminal, Divorce, Documentation, Domestic Violence, Family, Motor Accident, Muslim Law, R.T.I, Recovery, Succession Certificate, Wills Trusts, Revenue, Trademark & Copyright

Get Advice

तलाक Related Questions

Discover clear and detailed answers to common questions about Breach of Contract. Learn about procedures and more in straightforward language.