Law4u - Made in India

आपसी सहमति से तलाक में आमतौर पर कितना समय लगता है?

15-Oct-2026
तलाक

Answer By law4u team

हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act, 1955) की धारा 13बी के अंतर्गत आपसी सहमति से तलाक (Mutual Consent Divorce) की प्रक्रिया पूरी होने में आमतौर पर न्यूनतम 6 महीने से लेकर 18 महीने तक का समय लग सकता है। यह समय अदालत की कार्यवाही, दस्तावेजों की जांच और दोनों पक्षों की उपस्थिति पर निर्भर करता है। इस प्रक्रिया को कानूनी रूप से दो चरणों में विभाजित किया गया है और दोनों पक्षों को अदालत के समक्ष अपनी बात रखनी होती है। पहला चरण संयुक्त याचिका दायर करना है। पति और पत्नी दोनों को मिलकर अपने स्थानीय परिवार न्यायालय (Family Court) में आपसी सहमति से तलाक के लिए संयुक्त रूप से पहला गतिरोध आवेदन यानी प्रथम गति याचिका (First Motion Petition) दाखिल करनी होती है। इस याचिका में दोनों पक्षों के हस्ताक्षर होने आवश्यक हैं और यह स्पष्ट होना चाहिए कि वे अपनी मर्जी से और बिना किसी दबाव, धोखाधड़ी या जबरदस्ती के अलग हो रहे हैं। इसके साथ ही विवाह का प्रमाण पत्र, शादी के कार्ड, पिछले कुछ समय से अलग रहने के सबूत और आय प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज संलग्न किए जाते हैं। दूसरा चरण अदालत में बयान दर्ज कराना और समयावधि है। प्रथम गति याचिका दाखिल होने के बाद, परिवार न्यायालय के न्यायाधीश दोनों पक्षों के बयान दर्ज करते हैं और उनके बीच सुलह कराने का प्रयास करते हैं, ताकि यदि रिश्ता बचाया जा सके तो उस पर विचार किया जाए। जब न्यायालय इस बात से संतुष्ट हो जाता है कि दोनों पक्षों के बीच सुलह की कोई गुंजाइश नहीं है और वे अपनी स्वेच्छा से अलग हो रहे हैं, तब न्यायालय प्रथम गति याचिका को स्वीकार कर लेता है। इसके बाद कानून के अनुसार दोनों पक्षों को छह महीने की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि (Cooling-off Period) दी जाती है ताकि वे अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकें। यह छह महीने की अवधि प्रथम गति याचिका दायर करने की तिथि से शुरू होती है और अधिकतम अठारह महीने तक बढ़ सकती है। तीसरा और अंतिम चरण द्वितीय गति याचिका (Second Motion Petition) है। छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि समाप्त होने के बाद और अठारह महीने की समय सीमा के भीतर, दोनों पक्षों को दोबारा परिवार न्यायालय में उपस्थित होना होता है और द्वितीय गति याचिका दाखिल करके अंतिम आदेश की मांग करनी होती है। इस दूसरे चरण में भी दोनों पक्षों को अपने बयान दर्ज कराने होते हैं और यह पुष्टि करनी होती है कि वे अब भी अपने तलाक के फैसले पर कायम हैं। यदि इस दौरान भरण-पोषण (Alimony), बच्चों की कस्टमी (Child Custody) या संपत्ति के बंटवारे से जुड़ा कोई समझौता हुआ है, तो उसकी शर्तें भी अदालत के सामने रखी जाती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने का एक कानूनी विकल्प भी उपलब्ध है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कई मामलों में यह व्यवस्था दी है कि यदि दोनों पक्षों ने लंबे समय से अलग रहने के कारण अपने रिश्ते को पूरी तरह से मृत मान लिया है और सुलह की कोई संभावना नहीं बची है, तो हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act, 1955) की धारा 13बी के तहत छह महीने की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि को माफ करने के लिए न्यायालय में छूट की अर्जी दी जा सकती है। यदि अदालत इस बात से संतुष्ट होती है कि दोनों पक्षों ने पहले ही वर्षों से अलग रहकर काफी मानसिक पीड़ा झेली है और अब प्रतीक्षा अवधि उनके लिए और अधिक उत्पीड़न का कारण बनेगी, तो अदालत उस छह महीने की अवधि को माफ कर सकती है। ऐसी स्थिति में, यदि दोनों पक्ष तुरंत दूसरी याचिका दाखिल कर दें और अदालत की प्रक्रिया तेजी से चले, तो आपसी सहमति से तलाक का पूरा मामला कुछ हफ्तों से लेकर दो-तीन महीने के भीतर भी समाप्त हो सकता है। इसके विपरीत, यदि प्रतीक्षा अवधि माफ नहीं की जाती है और दोनों पक्ष सामान्य प्रक्रिया का पालन करते हैं, तो छह महीने की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि के कारण कम से कम छह से आठ महीने का समय लगना तय है। कई बार न्यायालयों में मुकदमों की भारी संख्या और न्यायाधीशों की व्यस्तता के कारण भी तारीखें मिलने में समय लग जाता है, जिससे प्रक्रिया और लंबी खिंच सकती है। इसलिए सामान्य परिस्थितियों में छह से बारह महीने का समय एक औसत अवधि माना जाता है जिसमें कागजी कार्रवाई, सुलह के प्रयास, कूलिंग-ऑफ पीरियड और अंतिम आदेश शामिल होते हैं। यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यदि दोनों पक्षों के बीच भरण-पोषण की राशि, एकमुश्त गुजारा भत्ता (One-time Alimony) या बच्चों की कस्टडी को लेकर कोई विवाद उत्पन्न हो जाता है, तो आपसी सहमति टूटने का खतरा रहता है, जिससे मामला विवादित तलाक में भी बदल सकता है, जिसमें वर्षों का समय लग सकता है। अतः आपसी सहमति से तलाक में समय बचाने के लिए यह जरूरी है कि याचिका दायर करने से पहले ही दोनों पक्ष सभी विवादित मुद्दों पर लिखित और स्पष्ट समझौता कर लें।

तलाक Verified Advocates

Get expert legal advice instantly.

Advocate Namburu Nageswararao

Advocate Namburu Nageswararao

High Court, Anticipatory Bail, Cyber Crime, Criminal, Family

Get Advice
Advocate Tej Brish Tripathi

Advocate Tej Brish Tripathi

Anticipatory Bail, Divorce, Domestic Violence, Family, Court Marriage

Get Advice
Advocate Ajay Kumar Mishra

Advocate Ajay Kumar Mishra

Cheque Bounce, Civil, Criminal, Family

Get Advice
Advocate Abdul Rahim Abdul Majid Mulla

Advocate Abdul Rahim Abdul Majid Mulla

Anticipatory Bail, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Consumer Court, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Documentation, Domestic Violence, Family, Insurance, Labour & Service, Landlord & Tenant, Motor Accident, Muslim Law, Property, R.T.I, Succession Certificate

Get Advice
Advocate Vimal Kumar Rameshchandra Joshi

Advocate Vimal Kumar Rameshchandra Joshi

Succession Certificate, Property, Revenue, Landlord & Tenant, Family

Get Advice
Advocate Rajeev Kumar Jha

Advocate Rajeev Kumar Jha

Anticipatory Bail,Civil,Consumer Court,Documentation,High Court,Insurance,Landlord & Tenant,Property,R.T.I,RERA,Startup,Succession Certificate,Wills Trusts,

Get Advice
Advocate Sumit Kalia

Advocate Sumit Kalia

Motor Accident, Landlord & Tenant, Arbitration, Breach of Contract, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Consumer Court, Court Marriage, Criminal, Divorce, Domestic Violence, Family, Recovery, Succession Certificate, Supreme Court, Revenue, Wills Trusts, R.T.I

Get Advice
Advocate Sachin Gupta

Advocate Sachin Gupta

Anticipatory Bail,Breach of Contract,Cheque Bounce,Child Custody,Civil,Consumer Court,Court Marriage,Criminal,Divorce,Domestic Violence,Family,High Court,Insurance,Labour & Service,Motor Accident,Property,R.T.I,Recovery,Wills Trusts,

Get Advice
Advocate Rajesh B Tiwari

Advocate Rajesh B Tiwari

Civil, Criminal, Divorce, Domestic Violence, Family

Get Advice
Advocate Bhargav Vala

Advocate Bhargav Vala

Cyber Crime, Anticipatory Bail, Criminal, Cheque Bounce, Divorce, Domestic Violence, Family, High Court, Recovery, Consumer Court

Get Advice

तलाक Related Questions

Discover clear and detailed answers to common questions about Breach of Contract. Learn about procedures and more in straightforward language.