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क्या कोर्ट मैरिज के लिए कपल का एक ही शहर में रहना ज़रूरी है?

Answer By law4u team

भारतीय कानून के अनुसार कोर्ट मैरिज या विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act, 1954) के तहत विवाह करने के लिए यह बिल्कुल भी ज़रूरी नहीं है कि कपल या जोड़ा एक ही शहर में रहता हो। इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत देश के किसी भी कोने में रहने वाले दो वयस्क व्यक्ति आपस में विवाह कर सकते हैं, भले ही वे अलग-अलग शहरों, अलग-अलग राज्यों या यहाँ तक कि अलग-अलग देशों में निवास करते हों। विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) की धारा 5 के अनुसार, विवाह करने की इच्छा रखने वाले पक्षकारों को उस जिले के विवाह अधिकारी (Marriage Officer) या विवाह रजिस्ट्रार (Marriage Registrar) को एक लिखित नोटिस देना होता है, जिस जिले में कम से कम उनमें से एक पक्षकार ने नोटिस देने की तारीख से ठीक पहले कम से कम 30 दिनों तक निवास किया हो। इसका सीधा सा मतलब यह है कि पूरे जोड़े को एक ही शहर में रहना अनिवार्य नहीं है, बल्कि दोनों में से केवल किसी एक का ही उस संबंधित जिले में पिछले 30 दिनों से रहना पर्याप्त कानूनी आवश्यकता को पूरा करता है। उदाहरण के लिए, यदि लड़का दिल्ली में रहता है और लड़की मुंबई में रहती है, तो वे दिल्ली या मुंबई दोनों में से किसी भी एक शहर के मैरिज रजिस्ट्रार कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। यदि वे दिल्ली में आवेदन करना चाहते हैं, तो लड़के को यह साबित करना होगा कि वह पिछले 30 दिनों या उससे अधिक समय से दिल्ली के उस विशेष जिले में रह रहा है। लड़की के लिए उस शहर में रहना अनिवार्य नहीं है, हालांकि शादी के समय उसे अपने शहर से आकर विवाह अधिकारी के सामने उपस्थित होना होगा और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने होंगे। जब कोई कपल अलग-अलग शहरों में रहता है और कोर्ट मैरिज की प्रक्रिया शुरू करना चाहता है, तो उन्हें निम्नलिखित कानूनी चरणों का पालन करना होता है। सबसे पहले, यह तय किया जाना चाहिए कि विवाह किस शहर या जिले में पंजीकृत कराया जाना है। उस शहर का चयन करने के बाद, जहाँ दोनों में से कोई एक व्यक्ति कम से कम 30 दिनों से रह रहा हो, वहाँ के विवाह अधिकारी के कार्यालय में निर्धारित प्रारूप में नोटिस प्रस्तुत किया जाता है। इस नोटिस के साथ दोनों की आयु के प्रमाण, पते के प्रमाण और पासपोर्ट साइज फोटो जैसे दस्तावेज जमा करने होते हैं। नोटिस जमा होने के बाद, विवाह अधिकारी उस नोटिस की एक प्रति अपने कार्यालय के एक स्पष्ट स्थान पर नोटिस बोर्ड पर चस्पा करता है ताकि जनता की जानकारी के लिए वह उपलब्ध रहे। इसके साथ ही, यदि दोनों पक्षकार अलग-अलग जिलों के निवासी हैं, तो विवाह अधिकारी उस दूसरे जिले के विवाह अधिकारी को भी नोटिस की एक प्रति सत्यापन के लिए भेज सकता है, जिस जिले में दूसरा पक्षकार निवास करता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी भी पक्षकार के विवाह पर कोई वैध कानूनी आपत्ति या बाधा मौजूद नहीं है। नोटिस प्रकाशित होने की तिथि से 30 दिनों की अवधि के भीतर कोई भी व्यक्ति उस विवाह पर आपत्ति उठा सकता है, यदि उसे लगता है कि विवाह करने वाले पक्षकारों में से कोई अयोग्य है, जैसे कि उनकी आयु कम है, वे पहले से विवाहित हैं और उनका पिछला विवाह कानूनी रूप से समाप्त नहीं हुआ है, या वे मानसिक रूप से सहमति देने में असमर्थ हैं। यदि निर्धारित 30 दिनों की अवधि के भीतर कोई आपत्ति प्राप्त नहीं होती है, तो विवाह अधिकारी दोनों पक्षकारों और तीन गवाहों को एक निश्चित तिथि पर अपने कार्यालय में बुलाता है। शादी के दिन, दोनों पक्षकारों और तीन गवाहों का विवाह अधिकारी के समक्ष शारीरिक रूप से उपस्थित होना अनिवार्य है। भले ही कपल अलग-अलग शहरों में रहता हो, लेकिन जिस दिन घोषणा और हस्ताक्षर की प्रक्रिया होनी है, उस दिन दोनों को विवाह अधिकारी के सामने मौजूद रहना होगा और यह घोषणा करनी होगी कि वे स्वेच्छा से एक-दूसरे से विवाह कर रहे हैं। इसके बाद विवाह का पंजीकरण पूरा हो जाता है और विवाह प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। इसके अलावा, यदि कपल हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act, 1955) के तहत पारंपरिक रीति-रिवाजों से शादी करके उसका पंजीकरण करवाना चाहता है, तो उसके नियम अलग हो सकते हैं। उस स्थिति में भी आमतौर पर उस क्षेत्र के रजिस्ट्रार कार्यालय में आवेदन किया जाता है जहाँ विवाह संपन्न हुआ हो या जहाँ पक्षकार सामान्य रूप से निवास करते हों। लेकिन विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act) के तहत शुद्ध रूप से कोर्ट मैरिज करने के लिए केवल एक पक्षकार का 30 दिन का निवास ही पर्याप्त होता है। संक्षेप में कहा जाए तो अलग-अलग शहरों में रहना कोर्ट मैरिज के रास्ते में कोई कानूनी बाधा उत्पन्न नहीं करता है। कपल अपनी सुविधा के अनुसार उस शहर को चुन सकता है जहाँ उनमें से एक का निवास प्रमाण पत्र बन सकता है। प्रक्रिया पूरी करने के लिए उन्हें केवल 30 दिन की नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद विवाह के दिन एक साथ एक ही स्थान पर विवाह अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना होता है।

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